आज, 2 मई, 2026 को रणदीप हुड्डा का एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाला संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने सरबजीत सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। अभिनेता, जिन्होंने 2016 की बायोपिक फ़िल्म 'सरबजीत' में इस असल जीवन के नायक काकिरदार निभाया था, ने अपनी पोस्ट में सरबजीत की दुखद कहानी को याद करते हुए यह बताया कि यह भूमिका सिर्फ एक फ़िल्म तक सीमित नहींरही, बल्कि उनके जीवन का एक अहम और बदलने वाला अनुभव बन गई।
रणदीप हुड्डा ने अपनी पोस्ट में एक साधारण सा कैप्शन लिखा, "02.05.2013. सरबजीत सिंह | सरबजीत | पुण्यतिथि", और इसके बाद जो संदेशसाझा किया, वह उनके दिल की गहरी बातों को उजागर करता है। उन्होंने लिखा, "प्रिय सरबजीत, तुम्हारी कहानी ने मुझे बदल दिया। जो सफ़र एकफ़िल्म की तैयारी के तौर पर शुरू हुआ था, वह कहीं ज़्यादा गहरा अनुभव बन गया। तुम्हारे ज़रिए मैंने दर्द, चुप्पी, हिम्मत और उम्मीद को महसूस किया।तुम्हारी भूमिका निभाने से मुझे आज़ादी, किसी को खोने के दुख और एक ऐसे परिवार की ताक़त का असली मतलब समझ आया, जिसने कभी उम्मीदनहीं छोड़ी।"
हुड्डा ने सरबजीत की बहन दलबीर कौर और पत्नी सुखप्रीत के निधन का भी ज़िक्र किया, और यह बताया कि उनकी बेटियों - स्वपनदीप और पूनम - के साथ बिताए गए पलों ने उन्हें सुकून और शांति दी। उन्होंने कहा, "कई साल बीत चुके हैं, लेकिन तुम्हारी कहानी आज भी मेरे साथ है। कुछ किरदारफ़िल्म खत्म होते ही चले जाते हैं। लेकिन तुम कभी नहीं गए। आज तुम्हारी पुण्यतिथि पर मैं तुम्हें पूरे सम्मान और भारी मन से याद कर रहा हूँ। तुम्हेंकभी नहीं भुलाया जाएगा। ओम शांति।"
यह श्रद्धांजलि केवल एक अभिनेता का सम्मान नहीं थी, बल्कि यह उस गहरे भावनात्मक जुड़ाव को भी दर्शाती है जो रणदीप हुड्डा ने सरबजीत सिंह केकिरदार के साथ महसूस किया। उन्होंने यह भी साझा किया कि सरबजीत की कहानी न केवल एक फिल्म के रूप में, बल्कि असल जीवन में भी उनकेसाथ एक छाप छोड़ गई है।
सरबजीत सिंह का जीवन, उनके संघर्ष और उनके परिवार की न्याय के लिए लंबी लड़ाई एक ऐतिहासिक कहानी है, जिसने न केवल भारत औरपाकिस्तान के बीच तनाव को उजागर किया, बल्कि मानवाधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष की भी मिसाल पेश की। सरबजीत को 1990 मेंपाकिस्तान में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था और 2013 में जेल के अंदर हुए एक हमले में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी कहानी बाद में एक फ़िल्म में बदल गई, जिसमें रणदीप ने उनकी भूमिका निभाई और अपनी अभिनय की सराहना पाई।
हुड्डा का यह संदेश न केवल उनके अभिनय के प्रति समर्पण को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि फ़िल्में केवल एक मनोरंजन का साधन नहींहोतीं, बल्कि वे इंसानियत, संघर्ष और वास्तविक जीवन के जज़्बे को पर्दे पर उतारने का माध्यम बन सकती हैं। रणदीप के शब्दों में गहराई औरसंवेदनशीलता है, और यह पोस्ट उन सभी दर्शकों के लिए एक याद दिलाने जैसा है कि कुछ किरदार और कहानियाँ कभी नहीं भूलतीं।
रणदीप हुड्डा की इस श्रद्धांजलि ने यह साबित कर दिया कि कला और अभिनय का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता, और जब आप किसी किरदार में पूरीतरह से समाहित होते हैं, तो वह किरदार आपके साथ हमेशा रहता है। यह पोस्ट एक अभिनेता के लिए सिर्फ़ एक भूमिका निभाने का अनुभव नहीं, बल्कि एक जीवन की क़ीमत, परिवार की ताकत और आत्म-संघर्ष की गहरी समझ का प्रतीक है।